भारतीय कोशिका जीवविज्ञानी डॉ० कमल रणदिवे कौन थे? | Who was the Indian cell biologist Dr. Kamal Ranadive?

 डॉ. कमल रणदिवे जीवनी, विकी, करियर, गूगल डूडल | 

भारतीय कोशिका जीवविज्ञानी डॉ० कमल रणदिवे कौन थे?

 
biography of Dr. Kamal Ranadive

 डॉ कमल रणदिवे कौन थीं ? कमल रणदिवे का संक्षिप्त परिचय 

पूरा नाम - कमल जयसिंह रणदिवे
जन्म -     8 नवंबर 1917   पुणे, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत
मृत्यु -     11 अप्रैल 2001 (उम्र 83)
राष्ट्रीयता - भारतीय
अग्रणी -  कैंसर अनुसंधान के लिए जाना जाता है
जीवनसाथी (पति) -   जयसिंह त्र्यंबक रणदिवे (एम। 1939)
पुरस्कार-    पद्म भूषण

वैज्ञानिक कैरियर

फील्ड्स सेल - बायोलॉजी
संस्थान-  कैंसर अनुसंधान केंद्र और टाटा मेमोरियल अस्पताल
डॉ कमल रणदिवे पति

कमल ने 13 मई को 1939 में जे.टी. रणदिवे से शादी की जो गणितज्ञ थे।।
 उनका एक पुत्र अनिल जयसिंह नाम का  हुआ और उसके बाद बॉम्बे आ गईं गई और वहीँ स्थायी रूप से बस गयीं।

डॉ० करण रणदिवे का जीवन परिचय

       डॉ. कमल रणदिवे ( जन्म 8 नवंबर 1917 -  मृत्यु 11 अप्रैल 2001) एक भारतीय बायोमेडिकल शोधकर्ता थीं, जो कैंसर और वायरस के बीच संबंधों के बारे में अपने शोध के लिए जाने जाती  हैं। इसके अतिरिक्त वह भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (IWSA) की संस्थापक सदस्य थीं।
        कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी डॉ० कमल रणदिवे को 104वें जन्मदिन पर Google डूडल से सम्मानित किया गया
भारतीय सेल बायोलॉजिस्ट डॉ. कमल रणदिवे की 104वीं जयंती पर Google ने आज 8 नवंबर को डूडल बनाकर  उन्हें सम्मान दर्शाया। वह कैंसर पर अपने विशेष शोध और शिक्षा और विज्ञान के माध्यम से एक अधिक निष्पक्ष समाज बनाने की अपनी इच्छा शक्ति  के लिए जानी जाती हैं।
         डूडल को भारत में रहने वाले कलाकार इब्राहिम रयंतकथ द्वारा चित्रित किया गया है, और डॉ रणदिवे को माइक्रोस्कोप से देखते हुए दिखाया गया है।
       “रणदिवे ने विदेशों में रहकर पढाई कर रहे भारतीय छात्रों और  विद्वानों को भारत बापस लौटने और अपने ज्ञान को अपने देश और लोगों के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। अन्य डॉक्टर्स की तरह सेवानिवृत्त होने के बाद वे घर नहीं बैठीं बल्कि 1989 में सेवानिवृत्त होने के बाद, डॉ रणदिवे ने महाराष्ट्र में गरीब और ग्रामीण समुदायों के बीच काम किया, इसके साथ ही महिलाओं को स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के रूप में प्रशिक्षण भी दिया और स्वास्थ्य और पोषण संबंधी शिक्षा प्रदान की। IWSA के अब भारत में 11 शाखाएं  हैं और विज्ञान में महिलाओं के लिए छात्रवृत्ति और चाइल्डकैअर विकल्प प्रदान करता है, ”Google ने एक बयान में लिखा।
 

 डॉ. कमल रणदिवे जीवनी, विकी


     कमल समरथ, जिन्हें चिकित्सा जगत में प्रमुख रूप से डॉ कमल रणदिवे के नाम से जाता है।  उनका जन्म 8 नवंबर 1917 को महाराष्ट्र के पुणे, में हुआ था। उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट्ता
प्राप्त करने के लिए चिकित्सा शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए उनके पिता ने प्रोत्साहित किया, उन्होंने वर्ष 1949 में कोशिका विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। कोशिका विज्ञान कोशिकाओं का अध्ययन है (Cytology is the study of cells)।

     रणदिवे भारतीय कैंसर अनुसंधान केंद्र (ICRC) में एक शोधकर्ता के रूप में कार्यरत थीं, जब उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने अमेरिका के बाल्टीमोर में जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय में अपनी फेलोशिप पूरी की। अपनी पढाई पूरी कर वह फिर भारत लौट आई और मुंबई में देश की पहली टिशू कल्चर प्रयोगशाला प्रारम्भ  की।

       रणदिवे ने माइकोबैक्टीरियम लेप्राई (Mycobacterium leprae) का भी अध्ययन किया जो कुष्ठ रोग का कारण बनने वाला जीवाणु है। पढ़ाई के दौरान, उन्होंने  आगे एक वैक्सीन विकसित करने में सहायता की।
रणदिवे, जो आईसीआरसी की निदेशक और कैंसर के विकास के पशु मॉडलिंग में एक डेवलपर बनीं, देश के पहले शोधकर्ताओं में से एक बन गए जिन्होंने स्तन कैंसर और आनुवंशिकता के बीच एक संबंध  का सुझाव दिया। वह कुछ वायरस और कैंसर के बीच संबंधों की पहचान करने वाली टीम में भी शामिल थीं।

रणदिवे ने 1973 में अपने 11 सहयोगियों के साथ वैज्ञानिक क्षेत्रों में महिलाओं का समर्थन करने के उद्देश्य से भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (IWSA) की स्थापना की।

डॉ. कमल रणदिवे करियर


बॉम्बे में रहकर ही  बॉम्बे यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की अपनी पढ़ाई पूरी की।

जॉन हॉपकिंस में अपना शोध समाप्त होने के बाद कमल मुंबई लौट आई और आईसीआरसी में अपना काम शुरू किया। यहां उन्होंने देश की पहली टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला की स्थापना की।
रणदिवे आईसीआरसी के निदेशक और कैंसर के पशु मॉडलिंग के अग्रणी थीं। वह पहली भारतीय थीं जिन्होंने स्तन कैंसर और आनुवंशिकता और कुछ कैंसर और वायरस के बीच की कड़ी का प्रस्ताव रखा।

उन्होंने माइकोबैक्टीरियम लेप्राई का भी अध्ययन किया जो कि कुष्ठ रोग का कारण बनने वाला बैक्टीरिया है। वह उसी के लिए वैक्सीन विकसित करने में सहायक थी।

यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है की 1973 में, डॉ. रणदिवे और उनके 11 सहयोगियों ने वैज्ञानिक क्षेत्रों में महिलाओं को आगे  लाने उद्देश्य से  भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (IWSA) की स्थापना की।
डॉ कमल रणदिवे उपलब्धियां

       उन्होंने बॉम्बे में प्रायोगिक जीवविज्ञान प्रयोगशाला और ऊतक संस्कृति प्रयोगशाला की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1966 से 1970 तक उन्होंने  भारतीय कैंसर अनुसंधान केंद्र के कार्यकारी निदेशक का पद संभाला था।
     उन्होंने कार्सिनोजेनेसिस, सेल ल्यूकेमिया, स्तन कैंसर और ओसोफेगल कैंसर में नई शोध इकाइयां भी स्थापित कीं। एक अन्य उपलब्धि कैंसर और हार्मोन की संवेदनशीलता और ट्यूमर वायरस के बीच
संबंधों की एक कड़ी खोजना थी।

कमल को 1982 में चिकित्सा के लिए पद्म भूषण (तीसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार) से सम्मानित किया गया था। उन्हें भारतीय चिकित्सा परिषद के पहले रजत जयंती अनुसंधान पुरस्कार 1964 से सम्मानित किया गया था।

इस पुरस्कार में एक स्वर्ण पदक और 15,000 का नकद पुरस्कार शामिल था। उन्हें माइक्रो-बायोलॉजी में उनके योगदान के लिए 1964 में  जी.जे. वाटमुल फाउंडेशन पुरस्कार से भी नवाज़ा गया था।

वह प्रथम एमेरिटस मेडिकल साइंटिस्ट थीं जिन्होंने  इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की स्थापना की।

 डॉ. कमल रणदिवे के विषय में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

१-डॉ कमल रणदिवे कौन थे?
डॉ. कमल रणदिवे (8 नवंबर 1917 - 11 अप्रैल 2001) एक भारतीय बायोमेडिकल शोधकर्ता थे, जो कैंसर और वायरस के बीच संबंधों के बारे में अपने शोध के लिए जाने जाते हैं। डॉ. कमल रणदिवे  IWSA  (भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ) की संस्थापक सदस्य थीं।
२- डॉ. कमल रणदिवे की मृत्यु कब हुई थी?

डॉ. कमल रणदिवे का 11 अप्रैल 2001 (उम्र 83 वर्ष) पर निधन हो गया।
३- डॉ. कमल रणदिवे के पति कौन हैं?

कमल ने 13 मई को 1939 में जे.टी. रणदिवे से शादी की जो गणितज्ञ थे।

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